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Press Release

International Mother Language Day
अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस पर
भोजपुरी के अंतर्राष्ट्रीय भाषा की रूप में मान्यता खातिर एगो निवेदन

21/Feb/09 07:12:27 AM


पूरा संसार में 21 फरवरी, अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस की रूप में मनावल जाला। इ दिन 1952 में ढाका में आजुए की दिने सहीद भइल ओ आत्मबलिदानियन के सर्धांजलि देबे खातिर मनावल जाला जे लोग बंगला भासा के मान्यता दिउआवे खातिर अपना के नेवछावर कS देहल।

भारतीय भोजपुरी संघ (भाई) भोजपुरी के मान्यता दिउआवे खातिर पूरा तरह से संकलप ले ले बा अउरी आजु की दिन के एही रूप में देखि रहल बा। भारतीय भोजपुरी संघ (भाई) भारत, नेपाल, गुआना, सूरीनाम, फीजी, त्रिनिदाद, टोबगो, अउरी मारीशस की सरकारन से ए देसन में भोजपुरी भासा के संवैधानिक मान्यता की संघे-संघे एकरी उचित बिकास के माँग कS रहल बा।

हम संयुक्त राष्ट्र की महासचिव अउरी यूनेस्को की सर्वेसर्वा से भी पूरा संसार में भोजपुरी बोलेवाला लोगन की सर्वे खातिर एगो उच्च स्तरीय कमेटी गठन कइले के माँग करतानी। एकरी साथे-साथे हम यूनेस्को में ए अंतररास्टीय भासा की बिकास अउरी परचार-परसार खातिर एगो अलगे विभाग बनवले
के सादर अनुरोध करतानी।

हम अमेरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामाजी के अमेरीका सरकार की नौकरियन में भोजपुरी और अन्य भारतीय भासाकुलि के बरीयता देबे खातिर दिली बधाई अउरी धन्यवाद दे तानी।

आखिर में इ जरूरी नइखे की मातृभासा उहे होखो जवन केहू की माई द्वारा बोलल जाव चाहें बचपन से ओही भासा की संगति में रहल जाव। ए कुल की वजह से कुछु भरम के इस्थिति पैदा होता अउरी मिसरीत भासाकुलि के पैदाइसी होता, जइसे- हिंगरेजी (हिंगलिस), जवन उतरी भारत में खतरा के रूप में उभरि रहल बिया।

आज की समय में राजनीति, अरथवेवस्था अउरी मीडिया भासाकुलि की विकास अउरी फैलाव के बुरा तरह से उलझा के धS देले बानेकुलि। देखल जाव तS ए भासन में से कुछुवे सफल भइल बानीकुलि जबकी अधिकतर उत्तरजीविता की लड़ाई में आपन असतित्व खो देले बानीकुलि। स्वभाविक रूप से देखल जाव तS सब देसन के जनजातीय भासा सबसे अधिक ए बुरी अवस्था के सिकार भइल बानीकुलि अउरी मिटले की कगार पर पहुँचि गइल बानीकुलि। अगर भारत में देखल जाव तS इहवाँ के जनजाति लोग अपनी राजभासा के अपना ले ले बा जवने की वजह से ए लोगन के आपन बोली चाहें भासा धीरे-धीरे मरSतानीकुलि चाहें मरले की कगार पर पहुँचि गइल बानीकुलि।

भासाकुलि पर आरथिक उदारीकरन अउरी वैश्वीकरन के परभाव भी साफ लउकता जवने की वजह से कुछ भासन के अस्तित्व मिटी गइल बा काहेंकि इ भासाकुलि पइसा कमइले में सहायक ना भइनीकुलि अउरी अनुपयोगी साबित भइनीकुलि। नवकी पीढ़ीन के भी ए भासाकुलि के सीखल गैरजरूरी लागल अउरी इ कवनो देस की एक या दू भासा के ही परमुख चाहें काम के समझनीकुलि।

आजु एगो रिपोट की अनुसार संसार के 6000 भासाकुलि पर खतरा बा अउरी सबसे खराब हालत तS अमेरिका अउरी आस्ट्रेलिया के बा जहाँ के सैकड़न भासा बिलुप्त हो गइल बानीकुलि। एसिया अउरी अफीरीका में जहाँ सैकड़नगो भासा पतन की कगार पर बानीकुलि उहवें यूरोप में लगभग पचासन भासाकुलि पर खतरा मँडरा रहल बा। इ सब देखि के जवन सबसे बड़हन सवाल उठता उ इ बा कि का कुछ अउरी समय बीतले की बाद भोजपुरियो के इ हे हालि होई? का भोजपुरियो इही सूची में सामिल हो जाई? ए सवाल के उत्तर हाँ में हो सकेला अगर समय रहते ए पर गंभीरता से बिचार नाहीं कइल गइल। एके मान्यता अउरी बढ़ावा देहले की साथे-साथे एकरी सुरछितता खातिर पहल नाहीं कइल गइल।

संसार के प्रमुख भासा जइसे अंगरेजी, फरेंच, जरमन, रूसी, स्पैनिस अउरी चीनीकुलि के दबाब बढ़ रहल बा जवने की वजह से बहुत सारी छोटकी अउरी अबिकसित भासाकुलि के अस्तित्व खतरा में बा। एइसन परिस्थिति में पता नाहीं इ भासाकुलि अपना के बँचा पइहें कुलि की नाहीं।


1961 की जनगनना की अनुसार पश्चिम बंगाल में दुगो एइसन बोली मिता एवं क्सरवार पावल गइल बानीकुलि जवन खाली एगो मनई द्वारा बोलल जात रहनीकुलि। अरुनाचल परदेस की दूर-दराज में एगो एइसन बोली रहे जवने में खाली पच्चीसेगो सबद रहे अउरी जवन सीमित अपेछा की संघे आदिम परिस्थिति में जीवन यापन क रहल लोगन खातिर आवस्यक नाहीं समझल गइल।

एगो भासा एगो बोली से श्रेष्ठ कइसे बा? मैक्स वेनरीच कहले बाने, "भँसो एगो बोलिए है जवने के एगो थल-सेना अउरी एगो जल-सेना होले।" जवनेगाँ एगो बड़हन मछली एगो छोट मछली के आपन सिकार बना ले ले ओहींगा भासाकुलि की ए आधुनिक दौर में जवन भासा चाहें बोली ए भासन से दबि
के आपन प्रभुता नाहीं रखि पाई उ गायब हो जाई चाहें खाली भासाविग्यान की किताबे में ओकर नावबस लउकी। रसेल होबन सांतवना की रूप में कहले बाने, "आखिर, कबले रउआँ ए पर ठीक से फैसला क पाइबि की केतना लोग ओ भासा के बोलेला जे खाली ओही भासा के बोलेला?"

पूरा धरती पर 4-5 महादीपन में फइलल भोजपुरी 84 मिलियन लोगन के मातृभाषा हS। संसार की भासाकुलि में जापानी अउरी जरमन की बाद इ 10वाँ नंबर पर बिया। भारत की भासाकुलि में देखल जाव तS इ हिंदी की बाद दूसरा सबसे बड़हन भासा बिया।

भोजपुरी भारत के बहुते जानल-मानल छेतरीय भासा हS जवन खाली उत्तरी-मध्य और पूर्वी भारत, बिहार के पश्चिमी भाग, झारखंड के उत्तरी-पश्चिमी भाग अउरी उत्तर-प्रदेश की पूर्वांचल में ही नाहीं अपितु भारत की लगभग सगरी महानगरन की साथे-साथे नेपाल की दक्खिनी मैदानन में भी अधिकता से बोलल जाले। वास्तव में देखल जाव तS भोजपुरी भारत के उ पहिली भासा हS जवन अपनी मातृभूमि भारत की संघे-संघे लगभग आधा दरजन अउरी देसन में अपनी भासा-सामर्थ्य अउरी बोलेवालाकुलि की बल पर स्वीकृत अउरी मान्य बिया अउरी उहवाँ की भोजपुरियन कुलि की द्वारा बोलल अउरी समझल जाले।

भारत अउरी नेपाल की अलावाँ संसार की दूसरन देसन जइसे गुआना, सूरीनाम, फीजी, त्रिनीदाद, तोबगो, मारीशस आदि में भी भोजपुरी एगो बड़ी पैमाना पर बोलल अउरी समझल जाले।

पूरा संसार में भोजपुरीभासी केतना बाने एकर अबहिन पता नइखे लागल अउरी भारत सरकार की जनगनना की हिसाब से इहो साबित भइल बा की अधिकतर भोजपुरीभासी अपनी मातृभासा की रूप में हिंदी चाहें उर्दू दरसावेला लोग न की भोजपुरी।

अब भारत सरकार ए परक्रिया में लागल बिया की भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची की तहत ए के भारतीय अनुसूचित भासा की रूप में संवैधानिक दरजा मिलो। नैपाल के इ नवकी सरकार भी नैपाल में भोजपुरी, मैथिली और अवधी के संवैधानिक मान्यता देबे के वादा कइले बिया।

इ एकदम सत्य बा की भोजपुरी दिन पर दिन निखरत अउरी विकास करत जातिया। बालीवुड में हिंदी की बाद भोजपुरी फिल्मन के ही स्थान बा। भारतीय फिलिम जगत में ए भोजपुरी फिल्मन के बुलंदी कायम बा। आजु की समय में भोजपुरी टीबी चैनल भी करोड़न दरसकन पर आपन जादू बिखेरि रहल बाने अउरी उनकरी दिलन पर राज क रहल बाने। आजु बिना कवनो सरकारी सहायता के भोजपुरी के पहिलका राष्ट्रीय समाचार पत्रिका 'द संडे इंडियन' के माँग बहुत ही बढ़ि गइल बा अउरी आजु इ पत्रिका अपनी सटीक अउरी येथारथ प्रस्तुति की कारन लाखन प्रबुध पाठकन अउरी आलोचकन की द्वारा सराहल जा रहल बिया।

परंतु अब समय आ गइल बा जब हमनीजान एक हो के ए नारा की संघे भोजपुरी के आवाज बुलंद कइल जाव-


अगर हिनदी हमनीजान के आन हS तS भोजपुरी असली पहिचान हS।

जय भोजपुरी, जय भोजपुरिया समाज, जय भारती।।


-ओंकारेश्वर पाण्डेय
www.BhojpuriIndia.org

 

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